Chhattisgarh Board of Secondary Education, Raipur

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल के कर्तव्य

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल के निम्नलिखित कर्तव्य हैं :-

  • क. माध्यमिक शिक्षा की ऐसी शाखाओं में, जिन्हे वह उचित समझे, शिक्षण पाठ्यक्रम विहित करना,
    1. मण्डल द्वारा संचालित की गई परीक्षाओं में अनुचित साधन उपयोग में लाने वाले या परीक्षाओं में हस्तक्षेप करने वाले अभ्यर्थियों पर शास्तियां, अधिरोपित करने के लिये विनियम बनाना ।
  • ख. ऐस पाठ्यक्रमों पर आधारित परीक्षाओं का संचालन करना और उसके संहायक समस्त उपाय करना.
  • ग. ऐसी अभ्यर्थियों को जिन्होंने -
    1. मण्डल द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं में
    या
    2. प्रायवेट तौर पर शिक्षण के विहित पाठ्यक्रम का अध्ययन किया हो, ऐसी शर्तों पर, जैसी कि विहित की जाय परीक्षाओं में प्रवेश देना.
  • घ. अपनी परीक्षाओं के परीक्षाफल प्रकाशित करना.
  • ड. मण्डल की परीक्षाएं उत्तीर्ण करने वाले व्यक्तियों को उपाधिपत्र या प्रमाण- पत्र प्रदान करना.
  • . छत्तीसगढ़ में स्थित संस्थाओं को मणडल के विशेषाधिकार देने के प्रयोजनों के लिये उनकी मान्यता प्रदान करना.
    1. शालाओं या संस्थाओं को मान्यता प्रदान करने की शर्तें, जिनके अन्तर्गत अध्यापकों की सेवा शर्तें, उनकी अर्हताओं संबंधी शर्तें, उपस्कर भवन, पेयजल, प्रसाधन, खेल का मैदान, प्रयोग शाला आदि अन्य शैक्षणिक सुविधाओं संबंधी शर्तें भी आती हैं, विहित करना.
    2. किसी संस्था की मान्यता को उस दशा में वापिस लेना जबकि जांच के पश्चात् मण्डल का यह कमाधान हो जाये कि उसके विशेषाधिकारां का उस संस्था द्वारा दुष्प्रयोग किया जाता है, यायह कि ऐसी संस्था को मान्यता प्रदान करने के लिये मणडल द्वारा अधिरोपित की गई शर्तों का अनुपालन नहीं किया जाना हैं.
    परन्तु अमान्यता मामूली तौर से शैक्षणिक सत्र के मध्य में प्रवर्तित नहीं की जायेगी. परन्तु यह और भी कि यदि अमान्यता शैक्षणिक सत्र के मध्य में प्रवर्तित की जाती है, तो इस प्रकार अमान्य की गई शाला के उन विद्यार्थियों को, जिन्हें कि मण्डल की परीक्षाओं में प्रवेश दिया गया होता, परीक्षा में प्रायवेट तौर पर बैठने के लिये अनुज्ञात किया जायेगा.
  • . मान्यता-प्राप्त संस्थाओं की या मान्यता के लिये आवेदन करने वाली संस्थाओं की दशा में के संबंध में (आयुक्त लोक शिक्षण) से रिपोर्ट तलब करना या ऐसी संस्थाओं के निरीक्षण का निर्देश देना.
  • . मान्यता-प्राप्त संस्थाओं के विद्यार्थियों के शारीरिक, नैतिक तथा सामाजिक कल्याण में अभिवृद्धि करने के लिये उपाय ग्रहण करना और उनके निवास तथा अनुशासन की शर्तें विहित करना.
  • झ. व्याख्यानों, प्रदर्शनी, शैक्षणिक प्रदर्शनियों का आयोजन करना और उनकी व्यवस्था करना तथा ऐसे अन्य उपय करना जो कि माध्यमिक शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिये आवश्यक हो.
  • ञ. ऐसी शर्तों के अधीन, जो कि विहित की जाए, छात्रवृत्तियां, पदक तथा पुरस्कार संस्थित करना और प्रदान करना. ट. ऐसी फीस की मांग करना और प्राप्त करना, जोकि विहित की जाये, जिसमें रजिस्ट्रीकरण के लिये आवेदन करने वाले शिक्षकों तथा प्रबंध समितियों की रजिस्ट्रीकरण फीस भी सम्मिलित है.
  • ठ. अपनी परीक्षाओं में उन अभ्यर्थियों को प्रवेश देना जिन्होंने मण्डल द्वारा संचालित पत्राचार पाठ्यक्रमों का परिशीलन किया है.
  • ड. मिडिल स्कूल तथा माध्यमिक शिक्षा में समन्वय सुनिश्चित करने की दृष्टि से मिडिल स्कूल शिक्षा के शिक्षण पाठ्यक्रम तथा पाठ्य विवरण के संबंध में राज्य शासन को सलाह देना.
    1. माध्यमिक शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिये सम्मेलनों, विचार गोष्ठियों, परिसंवादों का आयोजन करना.
    2. प्रश्न पत्र बनाने वालोंके लिये कर्मशलाओं (वर्कशाप) तथा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करना.
    3. नवीनतम-मूल्यांकन प्रक्रियाओं में अन्वेषण तथा गवेषणायें, करके या अन्य प्रयोग करके शालाओं की पाठ्यचर्या का आधुनिकीकरण करने, विज्ञान तथा गणित की शिक्षा कार्य अनुभव तथा व्यवसायीकरण को सुदृढ़ आधार करने के संबंध में आवश्यक उपय करना.
    4. परीक्षाओं को अधिक विधिमान्य, व्यापक तथा विस्तृत बनाने के लिये समस्त आवश्यक उपाय करना.
    5. आकलित (क्यूमुलेटिव) अभिलेखों तथा आंतरिक निर्धारण संबंधी अभिलेखों के माध्यम से विद्यार्थियों के व्यापक मूल्यांकन के लिये व्यवस्था करना.
  • ढ़ ऊपर उल्लिखित किये गये प्रयोजनों में से समनुषक्त या इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के प्रयोजन के लिये अन्य समस्त कार्य करना.


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