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प्रश्नों की गोपनीयता भंग एवं अनुचित साधन विषयक उपबंधित
नियमों पर आवश्यक कार्यवाही :
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल, रायपुर की
मान्यता प्राप्त परीक्षाओं के लिये नियम किये गये प्रश्नों की गोपनीयता भंग
होने को रोकने के लिये उपबंध करने तथा ऐसी परीक्षाओं में अनुचित साधन रोकने
के लिये शास्ति कार्यवाही के लिये और उनमें संसक्त कतिपय विषयों के लिये
उपबंध करने हेतु मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम 1937 (क्रमांक
10 सन 1937) राज्य में प्रभावशील हैं । अधिनियम के निम्न प्रावधान से सभी
सम्बंधितो को अवगत कराया जाकर तत्परता से कार्यवाही की जायेः-
मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम 1937 छत्तीसगढ़ मण्डल की परीक्षाओं के लिये मान्य - 3
* धारा - 3, प्रश्न - पत्रों की प्रतियां तथा
जानकारी की प्रस्थापना पर निर्बन्धता
कोई भी व्यक्ति, जो किसी मान्यता प्राप्त परीक्षा में
किसी पश्न - पत्र की प्रतियों की वितरण के लिए नियत समय के पूर्व अपने
कर्तव्यों के आधार पर वैसा करने के लिये विधिपूर्वक प्राधिकृत या अनुज्ञात
नहीं है- समय के पूर्व अपने कर्तव्यों के आधार पर वैसा करने के लिये
विधिपूर्वक प्राधिकृत या अनुज्ञात नहीं है -
(एक) ऐसे प्रश्न - पत्र या
उसके भाग या प्रति को अप्राप्त नहीं करेगा, अप्राप्त करने का प्रयत्न नहीं
करेगा या अपने कब्जे में नहीं रखेगा, (दो) कोई ऐसी जानकारी, जिसके बारे में
वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह ऐसे पश्न -
पत्र से सम्बंधित है या प्रोदभूत है, न तो देगा और न देने की प्रस्थापना
करेगा ।
* धारा - 3 - ए. उन व्यक्तियों द्वारा, जिनको कि परीक्षा
कार्य सौंपा गया हो, गोपनीयता भंग की जाने की रोक ।
कोई भी व्यक्ति जिसे मान्यता प्राप्त परीक्षा संबंधी कोई
कार्य सौंपा गया हो, कोई ऐसी जानकारी या उसका कोई भाग जो कि उसे ऐसे सौंपे
गये कार्य के आधार पर उसके कब्जे में आया हो, किसी अन्य व्यक्ति को
प्रत्यक्षतः प्रकट नहीं करेगा या प्रकट अथवा ज्ञात नहीं करवायेगा, जब तक कि
वह अपने कर्तव्यों के आधार पर वैसा करने के लिए अनुज्ञात न हो
।
* धारा - 3 - बी. बनावटी प्रश्न पत्र
निर्बधन
कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रश्न - पत्र को उस प्रश्न -
पत्र के रुप में अप्राप्त नहीं करेगा, कब्जे में नहीं रखेगा, वितरित नहीं
करेगा या अन्यथा उसका प्रचार नहीं करेगा या प्रचार नहीं करवायेगा जो कि ऐसा
प्रश्न - पत्र हो या जिसका ऐसा प्रश्न - पत्र होना अभिप्रेत हो जो कि आगामी
मान्यता प्राप्त परीक्षा में आने वाला हो या दिया जाने वाला हो
।
* धारा - 3 - सी. परीक्षा केन्द्र के समीप बेमतलब घूमने
आदि का प्रतिषेध
कोई भी व्यक्ति किसी ऐसे दिनांक या दिनांक को
जिसको/जिनको कि कोई मान्यता प्राप्त परीक्षा संचालित की जाये, उन घंटों के
दौरान, जबकि ऐसी परीक्षा किसी परीक्षा केन्द्र पर संचालित की जायें, तथा
ऐसी परीक्षा के प्रारंभ होने के पूर्व के दो घंटों के दौरान परीक्षा
केन्द्र के परिसरों के भीतर या परीक्षा केन्द्र से सौ गज की दूरी के अंदर
के किसी सार्वजनिक या प्रायवेट स्थान पर निम्नलिखित कार्यो में से कोई भी
कार्य नहीं करेगा, जब तक कि वह अपने कर्तव्यों के आधार पर वैसा करने के
लिये अनुज्ञात न हों या जब तक कि वह परीक्षा केन्द्र अधीक्षक से निम्न
श्रेणी के पदाधिकारी द्वारा प्राधिकृत न होः-
- बेमतलब घूमना,
- परीक्षा से सम्बंधित कोई भी
कागज या कोई अन्य वस्तु वितरित करना या वितरित करवाना या अन्यथा उसका
प्रचार करना या प्रचार करवाना,
- किसी ऐसे कार्यकलाप में निरत होना
जिसमें कि परीक्षा के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की या उसकी
(परीक्षा की) गोपनीयता पर प्रभाव पड़ने की संभावना हो ।
परंतु इस धारा
में अन्तर्विष्ट कोई भी बात उन परीक्षार्थीयों के, जो कि ऐसी परीक्षा में
सम्मिलित हो रहे हो जो कि ऐसे परीक्षा केन्द्र पर संचालित की जाये,
वास्तविक कार्यकलापों के संबंध में लागू नही होगी
।
* धारा - 3 - डी. मान्यता प्राप्त परीक्षाओं में अनुचित
साधनों के प्रयोग आदि का प्रतिषेध,
- कोई भी व्यक्ति किसी मान्यता प्राप्त परीक्षा में
अनुचित साधन नहीं अपनायेगा या उनका सहारा नहीं लेगा ।
- कोई भी
व्यक्ति किसी मान्यता प्राप्त परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग किये
जाने में सहायता नहीं देगा, इसका दुष्प्रेरण नहीं करेगा या उसके लिये
षड़यंत्र नहीं करेगा ।
* धारा - 3 - ई. मान्यता प्राप्त परीक्षा के संबंध में
आपराधिक अभित्रास
जो कोई परीक्षार्थी होते हुये, किसी परीक्षा केन्द्र के
परिसर में, शब्दों द्वारा या अंक विभेद द्वारा किसी ऐसे आयुध या किसी ऐसी
वस्तु का, जिसका कि प्रयोग यदि आक्रामक / आयुध के रुप में किया जाए तो उससे
किसी मनुष्य को क्षति कारित होना सम्भाव्य हो, या किसी वीक्षक
(इन्वीजिलेटर) को या किसी मान्यता प्राप्त परीक्षा के संचालन में ऐसे
भारसाधक अधिकारी की सहायता करने वाले कर्मवारी वृन्द के किसी सदस्य को
आपराधिकतया अभित्रस्त करता है, या जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति को, जो प्रश्न -
पत्र रचेयता (पेपर सेटर) की हैसियत में या किसी भी अन्य हैसियत में परीक्षा
के संचालन से अन्यथा सम्बद्ध उसी प्रकार आपराधिकतया अभित्रस्त करता है, वह
मान्यता प्राप्त परीक्षा के संबंध में आपराधिक अभित्रास के अपराध का दोषी
होगा ।
* धारा - 4 - शास्ति
जो कोई धारा 3 - ए, धारा 3 - बी, धारा - 4 डी के
उपबन्धों का उल्लंघन करेगा, या धारा 3 ई के अधीन आपराधिक अभित्रासका उपराध
करेगा, वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो
सकेगा, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से,
दण्डित किया जायेगा ।
* धारा - 5 - दोष सिद्ध राज्य के अधीन सेवा या नियोजन के
लिये निरर्हताकारी नैतिक अघमता का कार्य होगा ।
धारा - 4 के अधीन कोई दोष सिद्ध नैतिक अघमता के कार्य का
द्योतन करेगी और वह दोष सिद्धि ठहराये गये व्यक्ति को राज्य के कार्य कलाप
से सम्बंधित कोई नियोजन या सेवा पाने से निरर्हित कर देगी ।
* धारा - 6 - अपराधों का संक्षेपतः विचारण किया जाना
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं.2) में
अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुये भी, इस अधिनियम के अधीन के अपराध का
संक्षेपतः विचारण किसी ऐसे प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा किया
जावेगा जिसे राज्य सरकार द्वारा इस निमित विशेष रुप से संसक्त किया गया हो
और उक्त संहिता की धारा 262 से 265 (दोनों को सम्मिलित करते हुये) तक के
उपबन्ध यावतशक्य ऐसे विचारण को लागू होंगे । परंतु इस धारा के अधीन किसी
संक्षिप्त विचारण में किसी अपराध के लिए दोष सिद्ध के किसी मामले में,
मजिस्ट्रेट के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसी अवधि कारावास का दण्डादेश
पारित करें जिसके लिए ऐसा अपराध सुसंगत धारा के अधीन दण्डनीय है ।
पुनर्गणना
परीक्षाफल घोषित होने
के 30 दिनों के भीतर उत्तर-पुस्तिकाओं के अंकों की पुनर्गणना कराई जा सकती है
। प्रति विषय पुनर्गणना शुल्क 100 रु. है । छात्र चाहे जितने विषयों की
पुनर्गणना करा सकता है ।
उत्तर पुस्तिकाओं के अवलोकन हेतु निर्धारित
प्रक्रिया
- अभ्यार्थी को निर्धारित आवेदन पत्र तहत उत्तर
पुस्तिकाओं के अवलोकन हेतु अंकों के सत्यापन (पुनर्गणना) की सूचना जारी
होने पर की दिनांक से 15 दिवस के अन्दर अथवा सूचना संबंधी विज्ञप्ति
प्रसारित होने के दिनांक से 15 दिवस के अन्दर सशुल्क आवेदन प्रस्तुत करना
होगा । निर्धारित अवधि के बाद आवेदन ग्राह्य नहीं किये जायेगें ।
- उत्तरपुस्तिका के अवलोकन हेतु वे ही छात्र आवेदन रक
सकेंगे जिन्होंने पुनर्गणना हेतु आवेदन किया था तथा उन्हीं विषयों की उत्तर
पुस्तिका के अवलोकन हेतु आवेदन कर सकेंगे जिन विषयों की उन्होंने पुनर्गणना
हेतु आवेदन किया था ।
- उत्तर पुस्तिका अवलोकन हेतु 500/- पांच सौ रुपये प्रति
विषय शुल्क निर्धारित की जाती है, शुल्क का बैंक ड्राफ्ट राष्ट्रीयकृत
बैंक का जो सचिव, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल, रायपुर के नाम देय हो
मान्य किया जावेगा ।
- आवेदन पत्र के साथ अंकों की पुनर्गणना सूचना पत्र की
छाया प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा ।
- छात्र को भेजी गई उत्तर पुस्तिका की छाया प्रति में
किसी प्रकार की कांट/छांट कर प्रस्तुत करना दण्डनीय अपराध की श्रेणी के
अन्तर्गत होगा एवं मण्डल इस प्रकार के प्रकरणों पर नियमानुकुल कानूनी
कार्यवाही करने हेतु स्वतंत्र रहेगा ।
- अभ्यार्थी को उत्तर पुस्तिकाओं की छाया प्रतियां
सम्बंधित शाला के प्राचार्य के माध्यम से प्राप्त करना होगा । स्वाध्यायी
छात्र के नाते सम्मिलित होने वाले अभ्यार्थी को सम्बंधित केन्द्र के
प्राचार्य के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं की छाया प्रति प्राप्त करना होगा
। अभ्यार्थी को संस्था/केन्द्र पर मण्डल द्वारा रजिस्टर्ड डाक से भेजी गई
उत्तर पुस्तिका की सूचना पंजीकृत डाक द्वारा दी जावेगी ।
- संस्था/केन्द्र से उत्तर पुस्तिकाओं की छाया प्रति
प्राप्त करने का दायित्व सम्बंधित छात्र का होगा ।
- निर्धारित समयावधि के बाद या डाक विभाग के द्वारा
विलम्ब से वितरित करने का कारण मान्य नहीं किया जावेगा ।
- अंक सत्यापन का सूचना पत्रक में प्रकरण क्रमांक अंकित
है उत्तर पुस्तिका दिखाने हेतु आवेदन पत्र में प्रकरण क्रमांक दर्ज करना
आवश्यक है ।
उत्तर पुस्तिका के
पुनर्मूल्यांकन हेतु निर्धारित प्रक्रिया
- अभ्यार्थी को निर्धारित आवेदन पत्र में केवल उन्हीं
उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का आवेदन कर सकेगा जिन उत्तरपुस्तिका का
अवलोकन करने हेतु आवेदन परीक्षार्थी ने दिया था । उत्तर पुस्तिकायें अवलोकन
हेतु रजिस्टर्ड डाक द्वारा संस्था में भेजी जावेगी । उत्तर पुस्तिका की
छाया प्रति संस्था में प्राप्त होने की दिनांक से 15 दिवस के अन्दर सशुल्क
आवेदन प्रस्तुत करना होगा । निर्धारित अवधि के बाद प्राप्त आवेदन पत्र
ग्राह्य नहीं किये जायेगें ।
- उत्तरपुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन हेतु रुपये 500/-
(पांच सौ रुपये) प्रति विषय शुल्क निर्धारित की जाती है । शुल्क का बैंक
ड्राफ्ट राष्ट्रीयकृत बैंक का जो सचिव, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल,
रायपुर के नाम से देय हो मान्य किया जावेगा ।
- प्रत्येक उत्तरपुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन तीन अलग-अलग
मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा किया जावेगा । तीनों पुनर्मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा
दिये गये अंकों का औसत निकाला जावेगा । यह औसत यदि पूर्व में प्राप्त अंकों
से 10 प्रतिशत या 10 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त होने पर ही
पुनर्मूल्यांकन के परिणाम स्वरुप अंकों में वृद्धि मान्य की जावेगी ।
- पुनर्मूल्यांकन के परिणाम स्वरुप अंकों में 10 प्रतिशत
से अधिक वृद्धि होती है तो पुनर्गणना, उत्तरपुस्तिका का अवलोकन तथा
पुनर्मूल्यांकन के लिये दी गई समस्त फीस परीक्षार्थी को वापिस कर दी जावेगी
तथा पूर्व में जारी की गयी अंकसूची मण्डल कार्यालय में जमा करना होगा,
मण्डल उसके स्थान पर संशोधित अंकसूची निर्गमित करेगा । पुनर्मूल्यांकन में
अंकों में परिवर्तन की सूचना मण्डल छात्र को दी जावेगी ।
नकल प्रकरण के संबध में आवश्यक निर्देश
- केन्द्राध्यक्ष द्वारा निर्धारित नकल प्रपत्र (रिपोर्ट)
में दिए गए सभी बिन्दुओं को अनिवार्य रुप से भराया जावे ।
- नकल प्रपत्र (रिपोर्ट) में दोनों कक्ष पर्यवेक्षकों के
हस्ताक्षर एवं उनका मत अवश्य लिया जावे क्योंकि उनकी उपस्थिति में ही नकल
प्रकरण बनाया जाता है ।
- नकल सामग्री में सम्बंधित छात्र का रोल नंबर लिखने के
उपरांत नकल पकड़ने वाले अधिकारी तथा दोनों पर्यवेक्षकों के हस्ताक्षर
अनिवार्य रुप से लिए जावे जिससे यह सिद्ध किया जा सके कि नकल सामग्री
सम्बंधित छात्र से ही पकड़ी गई है ।
- नकल पकड़ने वाले अधिकारी से थोड़ा समय ले कर नकल
प्रपत्र (रिपोर्ट) में उड़नदस्ता का मत तथा हस्ताक्षर अवश्य करा लें ।
- अपूर्ण तथा अधूरा नकल प्रकरण रिपोर्ट बिना साक्ष्य के
मण्डल को विचारार्थ न भेजें। मण्डल को भेजने के पूर्व सभी बिन्दुओं की
खात्री कर लेवें ।
- केन्द्राध्यक्ष नकल में गंभीरतापूर्वक कार्यवाही करें ।
ध्यान रहे व्यक्तिगत द्वेष अथवा अन्य कारणों से नकल प्रकरण न बनायें छात्र
के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हों ।
- निर्धारित नकल प्रपत्र (रिपोर्ट) त्रुटिपूर्ण भरने के
कारण त्रुटियों के अनुसार केन्द्राध्यक्ष के पारिश्रमिक की राशि से दण्ड
स्वरुप कटौती किया जायेगा ।
सामान्य जानकारियां / निर्देश
परीक्षा शुल्क में रियायतें निम्नानुसार है :
- नेत्रहीन, मूक बधिर, स्पास्टिक सेरेविल पॉलिसी -
सम्पूर्ण शुल्क से छूट (मानसिक रुप से विकलांग ) से पीडि़त परीक्षार्थी
- मंडल द्वारा मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं के - केवल
60/- रुपये (अंकसूची शुल्क ) देय होगा, अवकाश प्राप्त शिक्षकों एवं
राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत यदि परीक्षा में बैठने का प्रथम अवसर हो तो ।
छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के पुत्र/पुत्रियां परीक्षार्थी
- मंडल के अधिकारी/कर्मचारी के पुत्र/पुत्रियां
परीक्षार्थी - तदैव
- मंडल द्वारा मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं में
कार्यरत - अर्ध्द परीक्षा शुल्क से छूट, यदि परीक्षा में बैठने
शिक्षक/शिक्षिकाओं की पुत्रियां परीक्षार्थीनी का प्रथम अवसर हो तो ।
- महिला परीक्षार्थिनी जिनके अभिभावकों की सभी स्त्रोतों
- तदैव से वार्षिक आय 15000/- रुपये से अधिक नहीं है ।
- छत्तीसगढ़ के निवासी अनुसूचित जाति, जनजाति -
- केवल प्रथम अवसर के लिए परीक्षा शुल्क एवं
परीक्षार्थी जिनके अभिभावक की समस्त स्त्रोतों से अंकसूची शुल्क से छूट
रुपये 40/- प्रति वार्षिक आय रुपये 1200/- से अधिक नहीं है । प्रायोगिक
विषय देय होगी आवेदन पत्र के मूल्य में छूट नहीं है ।
- सम्बंधित जिले में शासन द्वारा अनुसूचित जाति/
जनजाति की निर्धारित की गई जातियों के परीक्षार्थीयों के लिए यह छूट
रहेगी । जातियों की सूची निर्धारित प्रपत्र के प्रारुप के पीछे मुद्रित
है ।
- निर्धारित भेजें गये प्रपत्र के अनुसार पूर्ण
प्रविष्टियों सह तथा शासन द्वारा अधिकृत अधिकारियों द्वारा प्रमाणित किया
जाना आवश्यक है, मूल जाति तथा आय प्रमाण पत्र की प्रचार्य से प्रमाणित
फोटो प्रति प्रपत्र के साथ संलग्न करें । अपू्र्ण अथवा अनाधिकृत
अधिकारियों द्वारा प्रमाणित पत्र मान्य नहीं किये जायेंगे । प्राचार्य
अपने स्तर पर इनकी पड़ताल कर लें । अपूर्ण अथवा अमान्य प्रमाण पत्र वाले
छात्रों से पूर्ण शुल्क प्राप्त कर भेजें।
निम्नलिखित श्रेणी के छात्र/छात्रओं को केवल परीक्षा
शुल्क एवं प्रयोगिक शुल्क में छूट दिये जाने का निर्णय लिया गया है
:-
- नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस परेड में
शामिल होने वाले एन. सी. सी. कैडेट एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवक
एवं जूनियर रेडक्रास के सदस्य छात्र/छात्रा जो परेड में शामिल हों ।
- अंतर्राष्ट्रीय जम्बूरी में भाग लेने वाले
छात्र/छात्राएं ।
- केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय खेल
प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, कांस्य पदक एवं रजत पदक पाने वाले
छात्र/छात्राएं ।
- राष्ट्रपति एवं राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त स्काउट गाईड
की छात्र / छात्राएं ।
- बाल दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार प्राप्त
छात्र /छात्राएं । शुल्क रियायत के पात्र परीक्षार्थी के प्रमाण पत्र
निर्धारित प्रपत्र में मूल रुप से संलग्न करना अनिवार्य है । आय का प्रमाण
पत्र पिता / अभिभावक जिस कार्यालय में कार्यरत है, उनके मुख्य अधिकारी का
होना आवश्यक है । अन्य प्रकरण में रेवन्यू अधिकारी का प्रमाणीकरण रहे ।
प्रमाण पत्रों पर तिथि एवं पद मुद्रा अंकित होना भी आवश्यक है । प्रमाण
पत्रों में यह प्रमाणीकरण होना भी आवश्यक है कि वर्ष 2009 की परीक्षा में
बैठने का परीक्षार्थी / परीक्षार्थिनी का प्रथम अवसर है और आय का स्त्रात
नहीं है । अनुत्तीर्ण परीक्षार्थी को शुल्क रियायतों की पात्रता नहीं है ।
सामान्य जानकारियां / निर्देश
- केन्द्र परिवर्तन :
किसी भी स्वाध्यायी छात्र का
केन्द्र आवेदन पत्र भरने के उपरान्त परिवर्तित नहीं किया जावेगा । नियमित
छात्रों का केन्द्र परिवर्तन केवल उसी दशा में किया जावेगा जब छात्र के
पिता/पालक का स्थानांतरण अन्यत्र हो गया तथा छात्र एक संस्था छोड़कर दूसरी
संस्था में प्रवेश ले लेगा तथा प्रार्थना पत्र प्रवेश देने वाली नई संस्था
के माध्यम से प्राप्त होगा । केन्द्र परिवर्तन शुल्क रु. 100.00 निर्धारित
है ।
- विषय परिवर्तन
विषय परिवर्तन की सुविधा 31 दिसंबर तक है इसके पश्चात् विषय
परिवर्तन मान्य नहीं होगा । विषय परिवर्तन शुल्क रुपये 100.00 निर्धारित है
।
- जन्मतिथि संशोधन :
यदि किसी छात्र द्वारा आवेदन पत्र में गलत जन्मतिथि भर दी गई
है तो उसमें संशोधन करने हेतु पॉचवीं/आठवीं का मूल प्रमाण पत्र तथा
प्रमाणित प्रतिलिपि, स्कालर रजिस्टर की फोटो प्रति जो जिला शिक्षा अधिकारी
से प्रतिहस्ताक्षरित हो भेजने पर संशोधन विषयक कार्यवाही नियमानुसार की जा
सकेगी । संशोधन शुल्क रु. ...............निर्धारित है । तीन वर्ष उपरान्त
संशोधन मान्य नहीं किया जावेगा ।
- कृपांक :
मण्डल की प्रशिक्षण परीक्षाओं को छोड़कर शेष सभी परीक्षाओं के
लिए, अधिकतम 20 अंक कृपांक हेतु निर्धारित हैं । ये अंक तभी प्रदान किये
जावेंगे जब छात्र कृपांक के आधार पर परीक्षा उत्तीर्ण करता हो । किन्तु एक
विषय में छात्र को उस विषय हेतु निर्धारित अधिकतम अंकों के 10 प्रतिशत से
अधिक कृपांक नहीं दिए जावेंगे । कृपांक सुविधा तीन विषयों तक ही सीमित है ।
- श्रेणी सुधार :
छात्र श्रेणी सुधार हेतु परीक्षा उत्तीर्ण होने के अनुगामी दो
वर्षों में एक बार सम्मिलित हो सकते हैं । यदि छात्र की श्रेणी सुधार हुआ
अथवा दस प्रतिशत से प्राप्तांकों में वृद्धि (सुधार) होने पर उसे पुरानी
अंक सूची जमा करने पर नई अंकसूची दी जावेगी । श्रेणी सुधार या 10 प्रतिशत
से अधिक अंक वृद्धि न होने पर श्रेणी सुधार हेतु दी गई उनकी परीक्षा निरस्त
की जावेगी ।
परीक्षार्थीयों को लेखक दिये जाने सम्बन्धी :
- केवल निम्नांकित परीक्षार्थीयों को लेखक दिये
जाने की पात्रता है :-
(अ) दृष्टिहीन परीक्षार्थीयों को,
(ब) ऐसे परीक्षार्थी जो हाथ की हड्डी टूट जाने के कारण अथवा हाथ की
खराबी के कारण लिखने में सक्षम न हों ।
(स) स्पाटिक सेरेबिल पॉलिसी
मानसिक रुप से विकलांग से पीड़ित परीक्षार्थी को पात्रता निर्धारण हेतु
जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी / सिविल सर्जन का प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना
आवश्यक होगा । किसी प्रकरण विशेष में शासकीय अस्पताल के असिस्टेन्ट सर्जन
के प्रमात्र पत्र भी केन्द्राध्यक्ष ऐसी सुविधा अस्थाई रुप से दे सकते हैं,
परन्तु उसके तुरन्त बाद सिविलि सर्जन / मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी का
प्रमाणीकरण उपलब्ध कराना आवश्यक होगा ।
- लेखक की योग्यता विभिन्न परीक्षाओं के लिये
निम्नानुसार रहेगी । लेखक से उनकी शैक्षणिक अर्हता का घोषणा पत्र ले लिया
जावे । अधिक शैक्षणिक योग्यता का छात्र लेखक के रुप में न दिया जावे ।
(अ) हाईस्कूल / फिजिकल एजूकेशन परीक्षा के लिए - अधिकतम कक्षा
8 में अध्ययनरत ।
(ब) डिप्लोमा इन - एजूकेशन परीक्षाओं के लिए - अधिकतम
कक्षा 8 में अध्ययनरत ।
(स) 12वीं परीक्षाओं के लिए - अधिकतम कक्षा
9वीं में अध्ययनरत ।
(द) दृष्टिहीन परीक्षार्थीयों के लिए छात्र जिस
परीक्षा में सम्मिलित हो रहा है, उससे एक कक्षा कम अध्ययनरत लेखक दिया जाये
।
उदाहरणार्थ यदि छात्र हाईस्कूल परीक्षा में सम्मिलित हो रहा है तो उसे
कक्षा 9वें में अध्ययनरत छात्र लेखक के रुप में दिया जा सकता है । यह लेखक
उसी संस्था का भी हो सकता है । यह सुविधा केवल दृष्टिहीन परीक्षार्थीयों
- परीक्षार्थी जिस संस्था को हो, लेखक उस संस्था से
सम्बंधित नहीं हो एवं वह छात्र का संबंधी नहीं हो ।
- लेखक से घोषणा - पत्र
लिया जाय कि उसके शैक्षणिक आर्हता बिन्दु क्रमांक 2 के अनुसार ही है तथा वह
परीक्षार्थी से सम्बंधित नहीं है । सम्बंधित प्राचार्य / प्रधानाध्यापक का
प्रमाण-पत्र इस हेतु आवश्यक होगा कि वह छात्र उनकी शाला में 7वीं / 8वीं /
9वीं में पढ़ रहा है ।
सामान्य जानकारियां/निर्देश
* लाल स्याही
:
हायर सेकेण्डरीमें बुक-कीपिंग के प्रश्न पत्र के
अतिरिक्त परीक्षार्थी लाल स्याही का उपयोग उत्तर पुस्तिका में न करें ।
* पूरक की पत्रता
:
हायर सेकेण्डरीतथा हाईस्कूल परीक्षा के सभी
परीक्षार्थीयों को केवल एक विषय में पूरक की पात्रता घोषित की जायेगी तथा
पूरक का एक ही अवसर अगस्त/सितम्बर में दिया जायेगा ।
* स्वाध्यायी छात्रों
को अंक सूचियों की प्राप्ति :
स्वाध्यायी/पत्राचार से
पंजयीत छात्र जिस केन्द्र से परीक्षा में सम्मिलित हुए हैं, उनकी
अंकसूचियां उसी केन्द्र पर भेजी जावेगी । अंकसूची प्राप्त करने हेतु
छात्र को परीक्षा का प्रवेश-पत्र दिखाना अनिवार्य होगा ।
बोर्ड की विभिन्न परीक्षाओं में सम्मिलित होने
की पात्रता
मण्डल की विभिन्न परीक्षाओं में चार प्रकार के
छात्र/परीक्षार्थी सम्मिलित होने की पात्रता रखते हैं :-
- संस्थागत छात्र ।
- स्वाध्यायी छात्र (केवल
अनुत्तीर्ण पूर्व-छात्रों के लिये) ।
- पत्राचार पाठ्यक्रम के माध्यम
से शिक्षण प्राप्त (असंस्थागत) छात्र ।
- प्रौढ़ महिला ।
- संस्थागत छात्र : ऐसे छात्र मण्डल
द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं में नियमित रुप से अध्ययनरत् रहते हैं ।
इनकी उपस्थिति 75 प्रतिशत होना अनिवार्य है ।
- स्वाध्यायी
छात्र : जो छात्र मण्डल की किसी परीक्षा में एक बार प्रविष्ट होकर
अनुत्तीर्ण हो जाते हैं, वे इस श्रेणी के अन्तर्गत पुनः उस परीक्षा में
सम्मिलित हो सकते हैं । उन्हे अपने आवेदन पत्र के साथ मा.शि.म. की परीक्षा
में अनुत्तीर्ण होने की अंकसूची लगाना आवश्यक है । अनुत्तीर्ण होने के वर्ष
के अगले वर्ष तक ही यह सुविधा होगी । बाद के वर्षों में उसे पत्राचार से
परीक्षा देनी होगी ।
10वीं उत्तीर्ण के एक वर्ष के पश्चात् ललित कला
विषय लेकर छात्र 12वीं परीक्षा में स्वाध्यायी रुप से सम्मिलित हो सकता है
।
- पत्राचार पाठ्यक्रम के माध्यम से शिक्षण प्राप्त छात्र
: ऐसे सभी छात्र जो मण्डल की हाईस्कूल, हायर सेकेण्डरीपरीक्षा
में प्रथम बार असंस्थागत बैठना चाहते हैं उनका पत्राचार पाठ्यक्रम में
पंजीयन होना अनिवार्य है ।
- प्रौढ़ महिला : प्रौढ़
महिला जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक है वह निर्धारित शर्तों की पूर्ति उपरांत
हाईस्कूल परीक्षा में स्वाध्यायी के रुप में सम्मिलित हो सकती है । इस
प्रकार 25 वर्ष से अधिक की प्रौढ़ महिला हाईस्कूल परीक्षा उत्तीर्ण करने
तथा एक वर्ष की गैप के उपरांत प्रौढ़ महिला के नाते स्वाध्यायी
परीक्षार्थीयों के रुप में हायर सेकेण्डरीपरीक्षा में सम्मिलित हो सकती है
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