अंकसूची के प्रतिपर्ण देखने के लिए यहां क्लिक करें
छत्तीसगढ़
माध्यमिक शिक्षा मण्डल, रायपुर
क्रमांक
685 प अभिलेख/2004
रायपुर
11/02/04
:: आदेश
::
परीक्षा
समिति की बैठक दिनांक 8-1-2004 के निर्णयानुसार छात्र/छात्रा का नाम/पिता
का नाम/माता का नाम स्पेलिंग सुधार/जन्मतिथि में संशोधन करने विषयक नीति
के पालन में पूर्व के समस्त आदेशों को निरस्त करते हुये निम्रानुसार आदेश
प्रसारित किये जाते हैः-
छात्रा/छात्रा
का नाम/पिता का नाम/माता का नाम स्पेलिंग सुधार/जन्मतिथि में संशोधन परीक्षाफल
घोषित होने की दिनांक से आगामी तीन वर्ष की अवधि के भीतर प्राप्त प्रकरण
ही मान्य होंगें।
एक
- नियमित छात्र/छात्राओं के संशोधन के प्रकरणों हेतु आवश्यक प्रपत्र
1. कक्षा 5वीं /8 वीं प्रमाण पत्र तथा छाया प्रति प्रमाणित
2. विद्यालय के स्कालर रजिस्टर की छाया प्रति संबंधित जिला शिक्षा
अधिकारी से प्रतिहस्ताक्षरित
3. संशोधन शुल्क रु. 50/ का बैंक ड्राफ्ट जो सचिव, छत्तीसगढ़ माध्यमिक
शिक्षा मण्डल, रायपुर को देय हो।
4. प्रार्थना पत्र संबंधित प्राचार्य की अनुसंशा सह अग्रेषित उपरोक्तानुसार
प्राप्त प्रकरणों में कार्यवाही की जावे त्रुटिपाये जाने पर प्रकरण
अमान्य किये जावेगें।
ब
संशोधन नाम/पिता/माता उपरोक्तानुसार का नाम स्पेलिंग
दो - स्वाध्यायी एवं
पत्राचार के संशोधन के प्रकरणों पर क्रमांक एक के अनुसार संशोधन बिन्दु
क्रमांक दो के स्थान पर सक्षम न्यायालय द्वारा जारी रु. 10/- शपथ पत्र
सहित, अग्रेषणकर्ता अधिकारी/संबंधित प्राचार्य द्वारा अग्रेषित प्रार्थना
पत्र निर्धारित समय सीमा में स्वीकार किये जावेगें।
तीन - नाम स्पेलिंग
सुधार/जन्मतिथि संशोधन प्रस्तुत 5वीं/8वीं प्रमाण पत्र एवं विद्यालय
स्कालर पंजी में शिक्षा अधिकारी से प्रतिहस्ताक्षरित प्रति के अनुसार
ही किया जावेगा।
सचिव
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल,
रायपुर
पृष्ठांकन
क्रमांक 686 /प अभिलेख/2004
रायुर,
दिनांक 11/02/04
प्रतिलिपि
1. प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, सामान्य प्रशासन विभाग
2. प्रमुख सचिव, शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन,
3. समस्त कलेक्टर, छत्तीसगढ़
4. समस्त जिला शिक्षा अधिकारी, छत्तीसगढ़
5. समस्त प्राचायर्, मान्यता प्राप्त संस्थाऐं की ओर सूचनार्थ।
6. समस्त प्रथम श्रेणी/द्वितीय श्रेणी अधिकारी/कक्ष अधिकारियों की ओर सूचनार्थ
एवं पालनार्थ।
सचिव
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल,
रायपुर
:: अनुचित
साधन विषय अधिनियम एवं निर्देश ::
मध्यप्रदेश
अधिनियम (छत्तीसगढ़ परीक्षाओं के लिए मान्य)
(क्रमांक 10 सन् 1937) (मध्यप्रदेश) मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम 1937
(सेन्ट्रल प्राविन्सेस दिनांक 12 फरवरी, 1937 में प्रकाशित किया गया)
2. (मान्यता
प्राप्त परीक्षाओं के लिए किए गए प्रश्नों की गोपनीयता भंग होने को रोकने
के लिए उपलब्ध करने तथा एसी परीक्षाओं में अनुचित साधन अपनाने के लिए शास्तिक
कार्यवाही के लिये और उनसे संसक्त विषयों के लिए उपबन्ध करने हेतु अधिनियम)
और अतः इस अधिकों पारित किए जाने हेतु गवनमेंट ऑफ इंडिया एक्ट की धारा 80-
ए की उपधारा (3) के अधीन अपेक्षित किये गये अनुसार गर्वनर जरनल की पूर्व
मंजरी प्राप्त कर ली गई है। एतद द्वारा इसे निम्नानुसार अधिनियम किया गएः-
1. संक्षित नाम, विस्तार तथा प्रारंभ
(1)
इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम (मध्यप्रदेश) मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम
1937 है।
(2) इसकी विस्तार सम्पूर्ण 1 (मध्यप्रदेश) पर है और यह सम्पूर्ण 1 (मध्यप्रदेश)
में प्रवत्त होगा।
2. 2. इस
अधिनियम में, जब तक कि सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,
परिभाषाएं
- (क)
आपराधिक अभिन्नास का वही अर्थ होगा जो कि भारतीय दण्ड संहिता 1860 (1860
का स 45 की धारा 503 में दिया गया है और अभिव्यिक्त आपराधिकतया अभित्रस्त
करता है। तदनुसार अर्थ लगाया जाएगा।
- (ख)
मान्यता प्राप्त परीक्षा से अभिप्रेत है अनुसूची में भारतीय परीक्षाओं
में से कोई भी परीक्षा और उसके अन्तर्गत कोई एसी परीक्षा आती है जो किसी
सरकार के प्राधिकार के अधिन या किसी अधिनियमित के अधीन गठित किसी निकाय
द्वारा आयोजित की गई है।
- (ग)
अनुचित साधन से किसी मान्यता प्राप्त परीक्षा के संबंध में अभिप्रेत है
उस परीक्षा को लागू नियमों के अधीन अनुज्ञेय सहायता से, यदि कोई हो, भिन्न
कोई सहायता किसी लिखित, अभिलिखित (रिकार्डेड) या मुद्रित सामगऱी से या
किसी व्यक्ति से किसी भी रूप में लेना या लेने का प्रयत्न करना।)
3.
प्रश्न पत्र की प्रतियां तथा जानकारी की प्रस्थापना पर निर्बन्धन |
|
कोई
भी व्यक्ति जो किसी मान्यता प्राप्त परीक्षा में किसी प्रश्न-पत्र
की प्रतियों के विवर के लिये नियत समय के पूर्व अपने कर्तव्यों के
आधार पर वैसा करने के लिए विधिपूर्वक प्राधिकृत या अनुज्ञात नहीं है।
(एक)
ऐसे प्रश्न-पत्र या उसके भाग या प्रति को उपाप्त नहीं करेगा। उपाप्त
करने का प्रयत्न नहीं करेगा या अपने कब्जे में नहीं रखेगा।
(दो) कोई ऐसी जानकारी जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह
विश्वास करने का कारण है कि वह ऐसे प्रश्न-पत्र से संबंधित है या प्रोदभूत
है, न तो देगा और न देने की प्रस्थापना करेगा।
|
(3-ए
उन व्यक्तियों द्वारा जिनकों कि परीक्षा कार्य सौंपा गया हो, गोपनीयता
भंग की जाने की रोक) |
|
कोई
भी व्यक्ति, जिसे मान्यता प्राप्त परीक्षा संबंधी कोई कार्य सौंपा
गया हो, कोई ऐसी जानकारी या उसका कोई भाग जो कि उसे उसे ऐसे सौंपे
गए कार्य के आधार पर उसके कब्जे में आया हो, किसी अन्य व्यक्ति को
प्रत्यक्ष या परोक्षतः प्रकट नहीं करेगा या प्रकट अथवा ज्ञात नहीं
करवायेगा, जब तककि वह अपने कर्त्तव्यों के आधार पर वैसा करने के लिए
अनुज्ञान न हो।
|
3-बी
बनावटी प्रश्नों पर निर्बन्धन |
|
कोई
भी व्यक्ति किसी भी प्रश्न-पत्र के रूप में उपाप्त नहीं करेगा। कब्जे
में नहीं रखेगा, वितरित नहीं करेगा या अन्यथा उसका प्रचार नहीं करेगा
या प्रचार नहीं करवाएगा जो कि ऐसा प्रश्न-पत्र हो या जिसका ऐसे प्रश्न
पत्र होना अभिप्रेत हो जो कि आगामी मान्यता प्राप्त परीक्षा में आने
वाला हो यो दिया जाने वाला है। |
3-सी
परीक्षा केंन्द्र के समीप बेमतलब घुमने आदि का प्रतिषेध |
|
कोई
भी व्यक्ति किसी ऐसे दिनांक या दिनांकों जिसको/जिनको कि कोई मान्यता
प्राप्त परीक्षा संचालित भी जाए, उन घण्टों के दौरान, जबकि ऐसी परीक्षा
किसी परीक्षा केंन्द्र पर संचािलत की जाए तथा ऐसी परीक्षा के प्रारंभ
होने के पूर्व के दो घंटो के दौरान परीक्षा केन्द्र के परिसरों के
भीतर या परीक्षा केन्द्र से सौ गज की दूरा के अन्दर के किसी सार्वजनिक
या प्रायवेट स्थान पर निम्नलिखित कार्यों में से कोई भी कार्य नहीं
करेगा, जब तक कि वह अपने कर्त्तव्यों के आधार पर वैसा करने के लिए
अनुज्ञान न हो या जब तक कि वह परीक्षा केद्र अधीक्षक से अनिम्न श्रेणी
के पदाधिकारी द्वारा प्राधिकृत न हो।
(क) बेमतलब घूमना
(ख) परीक्षा से संबंधित कोई भी कागज या कोई अन्य वस्तु वितरित करना
या वितरित करवाना या अनयथा उसका प्रचार करना या प्रचार करवाना।
(ग) किसी ऐसे कार्यकलाप में निरत होना जिसमें कि परीक्षा के संचालन
पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की या उसकी (परीक्षा की) गोपनीयता पर प्रभाव
पड़ने की संभावना होः परन्तु इस धारा में अन्तिवष्ट कोई भी बात उन
परीक्षाथियों के जो कि ऐसी परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हों जो कि
ऐसे परीक्षा केंद्र पर संचालित कीजाए, वास्तविक कार्यकलापों के संबंध
में लागू नहीं होगा। |
1(3-डी
मान्यता प्राप्त परीक्षाओं) |
(1)
(2) |
कोई भी व्यक्ति किसी मान्यता प्राप्त परीक्षा में अनुचित साधन नहीं
अपनाएगा । या उनका सहारा नहीं लेगा।
कोई भी व्यक्ति किसी भी मान्यता प्राप्त परीक्षा में अनुचित साधनों
का प्रयोग किये जाने में सहायता नहीं देगा, इसका दुष्प्रेरणा नहीं
करेगा या उसके लिए षड्यंत्र नहीं करेगा।
|
3-ई
मान्यता प्राप्त परीक्षा के संबंध में आपराधिक अभित्रास |
|
जो
कोई परीक्षार्थी होते हुए किसी परीक्षा केंद्र के परिसर में, शब्दों
द्वारा या अंगविक्षेप द्वारा या किसी ऐसे आयुध या किसी ऐसी वस्तु का,
जिसका कि प्रयोग यदि आक्रमम आयुध के रूप में किया जाए तो उससे किसी
मनुष्य को क्षितकारित होना सुभ्भाव्य है, प्रयोग करके किसी परीक्षा
केंद्र के भारसाधक अधिकारी को चाहे वह किसी भी नाम से जाना जाता हो,
या किसी परवीक्षक (इन्वीजिलेटर) को या किसी मान्यता प्राप्त परीक्षा
के संचालन मे ऐसे भारसाधक अधिकारीकी सहायता करने वाले कर्मचारी वृन्द
के किसी सदस्य को आपराधिकतया अभित्रस्त करता है, या जो कोई किसी ऐसे
व्यक्ति को, जो प्रश्न पत्र रचेयता (पेपर सेटर) की हैसियत में परीक्षा
के संचालन से अन्यथा संबंद्ध है उसी प्रकार तथा परीक्षा के संबंध में
आपराधिक अभित्रास से अपराध का दोषी होगा।) |
1(14-शस्ति) |
|
जो
कोई धारा 3-ए, धारा-3बी, धारा-3सी, धारा-3डी के उपबंधों का उल्लंधन
करेगा या धारा-3ई के अधीन आपराधिक अभित्रास का अपराध करेगा, वह दोनों
में से किसी भी भांति के कारावास से जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा, या
जुर्माने से, जां पांच हजार रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित
किया जायेगा। |
1(5-दोषसिद्धि
राज्य के अधीन सेवा) या नियोजन के लिए निरर्हताकारी नैतिक अधमता का
कार्य होगा |
|
धारा
4 के अधीन कोई दोष नैतिक अधमता के कार्य का घोतक करेगी और वह दोषी
सिद्धि ठहराए गए व्यक्ति को राज्य के कार्यकलाप से संबंधित कोई |
6.
अपराधों को संक्षेप्तः विचारण किया जाना |
|
दण्ड
प्रकिया संहिता, 1973 (1974 ता स.2) में अंतिष्ट किसी बात के होते
हुए भी, इस अधिनियम के अधीन के अपराध का संक्षेपतः विचारण किसी ऐसे
प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा किया जायेगा जिसे राज्य सरकार
द्वारा इस निमित्ति विशेष रूप से संसक्त किया गया हो और उक्त संहिता
की धारा 262 से 265 (दोनों को सम्मिलित करते हुए) तक के उपबन्ध याथावस्यक
ऐसे विचारण को लागू होंगेः परन्तु इस धारा के अधीन किसी संक्षिप्त
विचारण में किसी अपराध के लिए दोष सिद्धि के किसी मामले में, मजिस्ट्रेट
के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह ऐसी अवधि के कारावास का दण्डादेश पारित
करें जिसके लिए ऐसा अपराध सुसंगत धारा के अधीन दण्डनीय है। |
7.
अनुसूची को संशोधिक करने की शक्ति |
|
राज्य
सरकार, अधिसूचना द्वारा, अनुसूची में किसी परीक्षा को जोड़ सकेगी या
उसमें से किसी परीक्षा को अपवर्जित कर सकेगी। |
(2) |
यदि
कोई परीक्षार्थी परीक्षा भवन में अनुचित साधनों, जैसे दूसरे परीक्षार्थी
से बातचीत करना, अपने पास कागज,पुस्तकें,नोट बुकें,लिखी चिटें रखना,स्केल
आदि लेखन अथवा अन्य प्रयोग में लाई जाने वाली सामग्री अथवा शरीर, कपड़ों
इत्यादि पर परीक्षा संबंधी बातें लिखकर लाना आदि का प्रयोग करता पकड़ा
जाता है तो केन्द्राध्यक्ष प्रत्येक ऐसे मामले में सावधानीपूर्वक इसकी
जांच करें एवं निम्नलिखित प्रक्रिया के अनुसार इस बाबत प्रतिवेदन प्रस्तुत
करें। |
(क) |
यदि अनुचित साधन संबंधी कोई सामग्री सरीक्षार्थी के पास पाई जाती है
तो उसे एवं उसकी उ.पु. तत्काल जब्त की जाये। ऐसी सामगऱी उ.पु. पर कक्ष
में नियुक्त पर्यवेक्षकों के हस्ताक्षर लेकर केन्द्राध्यक्ष स्वयं
अपने हस्ताक्षर करें। |
(ख) |
निरिक्षत दल द्वारा अनुचित साधन के जो भी प्रकरण पकड़े जाये, उनमें
छात्रों से जब्त की गई नकल सामग्री के पृष्ठ पर दल प्रमुख पद मुद्रा
लगाकर हस्ताक्षर करें, साथ ही प्रकरण पंजीकरण हेतु निर्धारित प्रपत्र
से संबंधित बिन्दु को अनिवार्यतः भरें। |
(ग) |
नियत प्रपत्र में सावधानीपूर्वक रिपोर्ट तैयार करें। यदि कोई सामगऱी
जब्त नहीं हुई तो इस प्रपत्र मे आवश्यक करायें तथा उसका नाम व पद ङी
अंकित करें। यदि नियत प्रुपत्र के साथ संलग्न करें। नियत प्रपत्र में
यथा स्थान परीक्षार्थी के हस्ताक्षर भी अंकित करायें। |
(घ) |
परीक्षार्थी एवं पर्यवेक्षक का बयाम लेकर रिपोर्ट के साथ संलग्न करें।
यदि परीक्षार्थी अपना बयान या निर्धारित प्रपत्र में हस्तात्रर करने
से इंकार करता है तो उसकी टीप अंकित की जाए एवं उसकी पुष्टि हेतु कक्ष
में नियुक्त पर्यवेक्षकों के हस्ताक्षर लिये जाये। परीक्षार्थी, उत्तर
पुस्तिका उपरोक्तनुसार जब्त करने के उपरान्त दूसरी उत्तर-पुस्तिका
जिसका लाल स्याही से निम्नांकित लिखा जाय एवं केन्द्राध्यक्ष अपने
हस्ताक्षर करें।
नकल प्रकरण दूसरी उत्तर पुस्तिक
समय ......................... दिनांक .................... |
2. |
तथा छत्तीसगढ़ माध्यमिक सिक्षा मण्डल द्वारा वर्ष 2003 की परीक्षाओं
के लिये अनुकूलिता दूसरी कापी देते समय परीक्षार्थी से कहा जाए कि
जिन प्रश्नों को वह हल कर चुका है, उसे छोड़कर शेष प्रश्न ही उसे हल
करना है।
जो उत्तर-पुस्तिका जब्त की जाए उस पर भी लाल स्याही से अंकित करें
"नकल प्रकरण" एवं केन्द्राध्यक्ष अपने हस्ताक्षर दिनांक
संहित करें। समय भी अंकित करें। इसके उपरांत इसमें जो भी रिक्त स्थान
हो उसे लाल स्याही से काट (क्रास) किया जाए एवं केन्द्राध्यक्ष अपने
हस्ताक्षर करें। |
(ड) |
परीक्षा का समय समाप्त होने पर दूसरी उत्तर-पुस्तिका,जो परीक्षार्थी
को दी गई है। उसे परीक्षार्थी से लेकर उसी उत्तर-पुस्तिका, से संलग्न
किया जाए जो पूर्व में जब्त की गई। यह ध्यान में रखा जाए कि इसे किसी
भी सूरत में अन्य उत्तर पुस्तिकाओं के साथ न बांधा जाए। इन दोनों उत्तर
पुस्तिकाओं को मंडल के संबंधित सम्भागीय अधिकारी को भेजा जाए। |
(1) |
परीक्षार्थी से पाया गया सामान, दोनों उ.पु. तथा नियत फार्म अन्त में
तैयार की गई रिपोर्च पेजिंग सहित सील्ड बन्द लिफाफों में उसी दिन पंजीकृत
डाक से उक्तानुसार भिजावाएं। अगर नकल प्रकरण पुलिस को सौंपा गया है
तो पुलिस को भेजे गए पत्र की प्रति के साथ उत्तर-पुस्तिका भी संलग्न
कर भेजे, लिफाफे के बांयी ओर स्पष्ट लिखेः- “अनुचित साधन“ |
(2) |
समस्त परीक्षाओं की नकल सामग्री, समस्त पूर्ति कर संबंधित मुख्यालय/सम्भागीय
कार्यालय, छत्तीसगढ़ माध्यिमक शिक्षा मण्डल की ओर भेजा जावे। |
(3) |
केन्द्राध्यक्ष परीक्षार्थी के पास से पाई प्रत्येक वस्तु पर कक्ष
में नियुक्ति पर्यवेक्षकों के हस्ताक्षर करवाकर अपने हस्ताक्षर व पद
मुद्रा एवं दिनांक एवं समय अंकित करें। |
(4) |
प्रायः यह देख गया है कि निरीक्षण दल द्वारा पकड़े गए प्रकरण में कोई
टिप्पणी-केन्द्राध्यक्ष के द्वारा दी नहीं जाती है। अतः निर्देशित
किया जाता है कि निरिक्षण में पकड़े गये प्रकरण में निधारित प्रपत्र
में पूर्ण जानकारी अवश्य अंकित कराई जावे व निरिक्षण पुस्तिका में
भी जानकारी अंकित की जाए। नकल संबंधी प्रकरण में सभी औपचारिकताओं की
पूर्ति कराने का उत्तरदायित्व केन्द्राध्यक्ष का ही है। निरीक्षण दल
द्वारा पकड़े गये प्रकरणों में नकल के फार्म पर निरीक्षण दल के हस्ताक्षर
भी कराये जावे व हस्ताक्षरों के नीचे उनका नाम भी अंकित किया जायें। |
(5) |
यह भी देखा गया है कि निरीक्षण दल द्वारा पकड़े गये नकल प्रकरण कभी-कभी
केन्द्राध्यक्ष द्वारा मण्डल को नही भेजे जाते हैं। निरीक्षण दल द्वारा
पकड़े गये नकल प्रकरण भी अनिवार्यतः अन्य नकल प्रकरणों के समान भेजे
जावें। यदि यह पाया गया कि केन्द्राध्यक्ष द्वारा निरीक्षण दल द्वारा
पकड़े गए नकल प्रकरण मण्डल को नहीं भेजे हैं तो संबंधित केन्द्राध्यक्ष
के विरूद्ध कार्ववाही की जावेगी। |
(6) |
प्रायः यह देखा गया है कि अनुचित साधन के प्रकरण निर्धारि प्रपत्र
(रिपोर्ट) की पूर्ण प्रविष्टियाँ पूर्ण रूप से भरी गई हैं अथवा नहीं
य़ इसे जांच उपरान्त तथा पर्यवेक्षक तथा केन्द्राध्यक्ष के स्पष्ट मत
सहित प्रकरण भेजा जावे। वर्ष 1998 में अनुचित साधन के एक प्रकरण में
निरीक्षण दल उत्तर-पुस्तिका बदलने का उल्लेख संबंधित प्रतिवेदन पर
किया था, जबकि केन्द्राध्यक्ष द्वारा उत्तर-पुस्तिका नहीं बदलने विषयक
टिप्पणी दी गई थी। उक्त प्रकरण में उक्त स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए
माननीय उच्च न्यायालय ने मण्डल को निर्देश दिये कि संबंधित छात्र का
परीक्षाफल घोषित किया जावे। उक्त कार्यवाही से मण्डल की प्रतिष्ठा
को आघात पहुंचा है। अतः इस प्रकार की विरोधाभास की स्थिति न हो, इसका
विशेष ध्यान रखा जावें। विशेष परिस्थितियों में विरोधाभासी टिप्पणी
होने पर प्रकरण की वास्तविक स्थिति का पूर्ण विवरण भी प्रतिवेदन में
दिया जावें। |
(9) |
केन्द्राध्यक्ष समस्त परीक्षाओं के (मुख्य/पूरक) अनुचित साधन के समस्त
पूर्ति के उपरांत संबंधित मुख्यालय/सम्भागीय अधिकारी की ओर भेदे जावेंगें। |
वैधानिक
प्रावधान (अनुचित साधन)
छत्तीसगढ़
में भी मध्यप्रदेश के समान मान्यता प्राप्त परीक्षाओं में अनुचित साधनों
का प्रयोग करने वाले परीक्षार्थियों के तीन वर्ष की सजा दी जाने का प्रावधान
रहेगा। यह व्यवस्था राज्य सरकार ने एक अधिनियम लागू की है।
इस अधिनियम
के अनुसार कोई व्यक्ति यदि किसी मान्यता प्राप्त परीक्षा में अनुसूचित साधनों
का प्रयोग करता है, या कोई किसी मान्यता प्राप्त परीक्षा के परीक्षार्थी
को अनुचित संसाधनों के प्रयोग में सहायता करता है, या कोई किसी मान्यता प्राप्त
परीक्षा से संबंधित कार्य करने वाले व्यक्ति के धमकी देता है, या किसी प्रकार
की हानि पहुंचाता है, या मान्यता प्राप्त परीक्षा परिसर में हथियार धारण
करता है, तो इसे अपराध माना जायेगा और ऐसे व्यक्ति को अधिक से अधिक तीन वर्षों
की सजा या पांच हजार रूपये जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकेगा। उल्लेखनीय
है कि मूल अधिनियम में पहले से ही मान्यता प्राप्त परीक्षा संचालन में व्यवधान
के अपराध माना गया है और उसके दोषी व्यक्ति के कारावास से जो तीन वर्षों
तक हो सकता है जुर्माने से जे पांच हजार रूपये तक हो सकता है, या दोनों से
दण्डित किया जा सकता है।
अधिनियम
के माध्यम से ही यह भी व्यवस्था कर दी गई है कि मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त
परीक्षा अधिनियम के तहत दोषी पाये गए व्यक्ति को राज्य शासन की सेवा में
नही लिया जा सकेगा तथा अधिनियम के तहत अपराध का संक्षिप्त दोषी पाये गए व्यक्ति
को राज्य शासन की सेवा में नहीं लिया जा सकेगा तथा अधिनियम के तहत अपराध
का संक्षिप्त निराकरण प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के द्वारा किया जा
सकेगा।
इस अधिनियम
के प्रावधानों से कृपया परीक्षार्थियों को अवगत कराने का कष्ट करें शाला
के नोटिस बोर्ड पर भी इस विषय निर्देश मोटे अक्षरों में कृपया चस्पा कर दे
शाला के परीक्षा कक्ष में इस सूचना नोटिस
बोर्ड पर भी लगा दें।
वर्तमान
में प्रभावशील मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम 1937 में समय-समय पर संशोधन
किए गए हैं जिनके अन्तर्गत प्रश्न पत्रों की गोपनीयता भंग करना, परीक्षा
संचालन में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न करना, परीक्षा संचालन से सम्बद्ध
किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार कू क्षति पहुंचाना अथवा उसके कार्य में अवरोध
उत्पन्न कराना तथा परीक्षा की विश्वसनीयता एवं पवित्रता को भंग करते हुए
अनुचित साधन अपनाने के किसी भी प्रकार के कृत्य को मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त
परीक्षा संशोधन अधिनियम 1984 की धारा 4 के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध घोषित
किया गया है। जिसके अन्तर्गत दोषी व्यक्ति को किसी भी प्रक3र के तीन वर्ष
के कारावास अथवा पांच हजार रूपये तक के जुर्माने अथवा दोनों दण्डों से दण्डित
किए जाने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त इन अपराधों में दण्डित किसी भी व्यक्ति
की नैतिक अक्षमता के फलस्वरूप किसी भी शासकीय नियोजन या सेवा पाने से भी
धारा 5 के अन्तर्गत दण्डित किया गया है।
उपरोक्त
उल्लिखित वैधानिक प्रावधानों को सुगमता के आधार पर चार श्रेणियों के अपराधों
में विभक्त किया जा सकता है, जो निम्नानुसार है ---------
1.
|
मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा (संशोधन) अधिनियम 1966 धारा 3
(ए) |
किसी
भी प्रकार से किसी भी स्तर पर प्रश्न पत्रों की पनीयता भंग करना अथवा
उसमें किसी भी प्रकार से लहयोग की भूमिका निभाना। |
2.
|
मध्यप्रदेश
मान्यता प्राप्त परीक्षा (संशोधन) अधिनियम 1966 धारा 3 (सी) |
परीक्षा
केन्द्र के समीप बे-मतलब घूमने और किसी भी प्रकार से परीक्षा संचालन
में किसी भी प्रकार का व्यवधान अथवा गतिरोध उनत्पन्न करना । |
3.
|
मध्यप्रदेश
मान्यता प्राप्त परीक्षा (संशोधन) अधिनियम 1984 धारा 3 (इ) |
परीक्षा
संचालन हेतु अधिकृत किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार से कोई धमकी
देना अथवा किसी भी प्रकार की क्षित करना अथवा उसके कार्य निष्पादन
में अवरोध उत्पन्न करना आदि। |
4. |
मध्यप्रदेस मान्यता प्राप्त परीक्षा (संशोधन) अधिनियम 1984 धारा 3
(डी) |
अनुचित
ढंग से परीक्षा उत्तीर्ण करने हेतु किसी भी प्रकार से परीक्षा भवन
में अनुचित साधन उपयोग में लाना । |
उपरोक्त
उल्लिखित 1 से 4 तक की श्रेणी के अपराध अत्यंत गंभीर स्वरूप के है
उपरोक्त
मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा (संसोधन) अधिनियम 1966 धारा 3 सी, इ
व डी वर्ष 2004 की परीक्षाओं के लिये छत्तीसगढ़ के लिये मान्य रहेगी।
अतः किसी
भी स्थिति में इन प्रकरणों में किसी भी प्रकार की कोई शिथिलता नहीं दर्शाई
जाये।
इन तीनों
श्रेणी के प्रकरणों में संबंधित केन्द्रध्यक्ष त्वरित कार्यवाही करते हुए
ऐसे समस्त प्रकरण अविलंब संबंधित पुलिस स्टेशन को सौपें और विधिवत् रूप से
तुरन्त पुलिस स्टेशन पहुंचकर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज
कराये और दर्ज कराई एफ. आई.आर. की प्रति मण्डल को रजिस्टर्ड डाक से अविलंब
भेजैं। यदि इन अपराधों में परिक्षा में सम्मिलित कोई छात्र भी हो तो उसका
पूर्ण अर्थात् रोल नम्बर, छात्र का नाम, पिता का नाम, छाक्ष का पूरा पता,
घटना का पूर्ण विवरण आदि एख स्टेटमेंट के रुप में लिफाफे में मण्डल को रजिस्टर्ड
डाक से अग्रेषित करें।
चौथी श्रेणी
के ऐसे समस्त प्रकरणों में जिनमें छात्रों द्वारा परीक्षा केन्द्र पर केवल
नकल की गई अथवा नकल करने का प्रयास मात्र किया गया है और इसके अतिरिक्त किसी
प्रकार की कोई अन्य उद्दण्डता नहीं बरती गई है और परीक्षा में किसी प्रकार
को कोई गितरोध व्यवधान उत्पन्न हुआ है तो ऐसे समस्त प्रकरण मध्यप्रदेश माध्यमिक
शिक्षा अधिनियम 1965 की धापा 8 (क,क) तथा माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश
विनियम 1965 की धारा 125 के अन्तर्गत मण्डल की परीक्षाफल समिति के समक्ष
निर्णयार्थ प्रस्तुत करने हेतु मण्डल को अग्रेषित किए गए। प्रत्येक प्रकरण
का परीक्षण करने के उपरान्त मण्डल की परीक्षाफल समिति अपराध के स्वरुप को
दृष्टिगत रखते हुए यथा योग्य निर्णय लेगी। अनुचित साधनों के समस्त प्रकरणों
के संबंध में समुचित कार्यावाही उन निर्देशों के अन्तर्गत की जाये जो इस
पुस्तिका के परिशष्ट अ में अनुचित साधनों के प्रकरणों के अन्तर्गत दशाई गई
है।
उपरोक्त
के साथ ही यहां विशेष उल्लेखनीय है कि माध्यमिक शिक्षा मण्डल, प्रदेश द्वारा
परीक्षाओं में सामूहि नकल किए जाने के परिणामस्वरुप परीक्षार्थियों का परीक्षाफल
निरस्त करने के एक न्यायिक प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीढ द्वारा
पारित निर्णय के विरूद्ध मण्डल द्वारा माननीय उच्चतम न्यायलय के समक्ष सिवित
अपील क्रमांक 470/97 प्रस्तुत की गई, जिसमें सामूहिक नकल के कारण परीक्षाफल
निरस्ती की मण्डल की कार्यवाही को भी माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायोचित
ठहराते हुए निर्देशित किया गया कि विद्यालयों में परीक्षार्थियों को सामूहिक
नकल कराने पर तत्काल प्रभावित तरीके से रोक लगाने की सख्त कार्यवाही की जावे
और परीक्षार्थयों को एक सबक के रुप में प्रसारित किया जाना चाहिए कि सामूहिक
नकल जैसी धोखा-धड़ी एवं छल कपटपूर्ण व्यवहार परीक्षा की सफलता के लिए कभी
भी सहायक सिद्ध नहीं होगी तथा उन्हें परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के
लिए एक बार फिर से निश्छल प्रयास करना चाहिए।
माननीय
सर्वोच्च न्यायालय का यह भी अभिमत है कि परीक्षा प्रभारी, माध्यमिक शिक्षा
मण्डल द्वारा ऐसे केन्द्राध्यक्षों / पर्यवेक्षकों एवं सामूहिक नकल को बढ़ावा
देने वाले दोषी भागीदार तत्वों के विरुद्ध सख्त कार्यावाही की जावे, जो ऐसे
आपराधिक कार्य-कलापों में भागीदारी रखते हुए मूक दर्शक बने रहते हैं, यदि
मण्डल इन आपराधिक तत्वों को हिन्साजन्य आपराधिक प्रवृत्ति के विरुद्ध कार्यवाही
करने में अपने को असुरिक्ष सहसूस करता है तो आवश्यकतानुसार मण्डल सशस्त्र
पुलिस बल का सहयोग लेकर परीक्षार्थियों की सांमूहिक नकल पर प्रभावी कार्यवाही
करें।
इस प्रकार
मण्डल की परीक्षाओं में सामूहिक नकल के आपराधिक कृत्य को बढ़ावा देने वाले
केन्द्राध्यक्षों /पर्यवेक्षकों सहित दोषी भागीदार तत्वों के विरुद्ध मध्यप्रदेश
मान्यता प्राप्त अधिनियम 1937 के अन्तर्गत दण्डात्मक कार्यवाही किए जाने
हेतु एफ. आर. संस्थित कर उक्त संस्थाओं की मान्यता समाप्त करने की कार्यवाही
किया जाना समचीन है। अतः इसे संबंधित भली भांति अंकित कर पालन करें।
इसी तरह
में माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर ने सामहिक नकल से संबंधित याचिका क्रमांक
3819/99 क्रमांक 3818/99, क्रमांक 4815, क्रमांक 4220/99, क्रमांक 4819/99.
क्रमांक 4820/99, क्रमांक 4818/99, क्रमांक 3961/99, क्रमांक 4226/99 की
याचिकायें निरस्त करते हुए मण्डल की सक्षम समिति द्वारा की गई कार्यवाही
को बहुत ही व्यावहािरक कार्यवाही निरुपित की।
आश की जाती
है, कि परीक्षाओं का संचालन शांतिपूर्ण, स्वच्छ, नियमबद्ध और प्रतिष्ठित
ढंग से किया जाएगा।
:: अनुचित
साधन विषयक निर्देश ::
मण्डल द्वारा
संचालित परीक्षाओं में अनुचित साधन अपनाने के संबंध में छात्रों एवं अन्य
व्यक्तियों द्वारा किये जाने वाले गंङीर कृत्यों को रोकन के लिए कार्यवाही
निर्देशः-
जैसा कि आपकों विदित है कि मध्यप्रदेश प्राप्त परीक्षा अधिनियम 1937 (क्रमांक
10 सन् 1937) अघतन संशोधन सहित में, मान्यता प्राप्त परीक्षाओं के प्रश्नो
की गोपनीयता भंग होने को रोकने, ऐसी परीक्षाओं में अनुचित साधन अपनाने के
लिए शास्ति कार्यवाही के लिए और उनसे संशक्त विषयों के लिए उपबन्ध किये गये
हैं।
परीक्षा
में अनुचित साधन अपनाने के संबंध में छात्रों एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा
अपनाने वाले कृत्यों में अत्याधिक गंभीर स्वरुप के कृत्यों में त्वरित कार्यवाही
कर प्रकरण पुलिस को सौंपना आवश्यक है । ऐसे कृत्य निम्नानुसार हो सकते हैं:-
(अ) |
ऐसे समस्त प्रकरण जिनमें प्रश्न पत्रों की गोपनीयता भंग की जावे अथवा
गोपनीयता भंग करने का प्रयास किया जावे। वह गोपनीयता चहे स्वयं छाक्षों
द्वारा भंग की जावे अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा और इसमें से समस्त
कृत्य सम्मिलित है, तो जो मध्यप्रदेश 1937 की धारा 3 में निहत है।
|
(ब) |
वे समस्त प्रकरण जिनमें केंद्र पर परीक्षा दे रहे छात्रों को कोई भी
बाहरी व्यक्ति किसी भी प्रकार से अनुचित साधनों के प्रयोग करने में
सहायता दे रहा हो या उसका दुष्प्ररणा कर रहा हो अथवा इसके लिए किसी
भी प्रकार का षड्यंत्र कर रहा हो।
|
(स) |
वे समस्त प्रकरण जिनमें परीक्षार्थी परीक्षा केन्द्र पर अपराधिक अभित्रास
के दोषी पाये जाये और परीक्षार्थी शब्दों द्वारा, अंग विशेष द्वारा
किसी भी प्रकार के हथियार द्वारा किसी भी ऐसी वस्तु द्वारा जिसके प्रयोग
से किसी मनुष्य की क्षितकारित होना संभावित बो, प्रयोग करें, चाहे
वह प्रयोग केंद्राध्यक्ष के विरुद्ध हो या इन्विजीलेटर के या केन्द्र
पर परीक्षा संचालन से संबंधित कार्य कर रहे किसी भी अधिकृत व्यक्ति
के
विरुद्ध हो। |
(द) |
वे समस्त प्रकरण जिनमें छात्रों द्वारा केंद्र पर परीक्षा संचालन
से संबंधित किसी भी व्यक्ति के विरुद्द इस प्रकार की उदण्डता का
प्रदर्शन किया जावे, जिसस परीक्षा संचालन में व्यवधान उत्पन्न हो।
|
(य) |
वे समस्त प्रकरण जिसमें परीक्षा केन्द्र के भीतर अथवा परीक्षा से संबंिधत
कोई भी कागज या अन्य कोई वस्तु वितरित की जा रही हो या वितरित किये
जाने का प्रयास किया जा रहा हो, या उसका प्रचार किया जा रहा हो, या
प्रसार कराया जा रही हो। |
(र) |
सामूहिक नकल के ऐसे समस्त प्रकरण जिनमें छात्रों को सचेक किए जाने
के उपरान्त भी उनके द्वारा निरन्तर सामूहिक नकल की जा रही हो। |
2. |
उपर्युक्त प्रकार के गंभीर स्वरुप संबंधित केन्द्रध्यक्ष द्वारा पुलिस
को सौंप दिए जावेंगे। केन्द्र के निरीक्षण के लिए कलेक्टर भी केंद्र
पर जाते है और उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति भी। इसके अतिरिक्त केन्द्र
निरीक्षण हेतु मण्डल एवं शिक्षा संचालनालय द्वारा प्लाइंग स्क्काड
भी भेदे जाते हैं। ऐसी स्थिति में इन अधिकारियों को बी पुलिस में शिकायत
दर्ज कराने के लिए अधिकृत किया गया है। |
3. |
पुलिस को सौंपे जाने वाले समस्त प्रकरणों की जानकारी केंद्राध्यक्ष
मण्डल को भेदे जिसमें यदि परीक्षा में सम्मिलित हो रहे किन्ही छात्रों
के विरूद्ध पुलिस में प्रकरण दर्ज किया गया गया हो तो उनके परीक्षाफल
मण्डल द्वारा न्यायिक कार्यवाही पूर्ण होने तक रोके जावे। |
4. |
ऐसे प्रकरणों में जो अत्यधिक गंभीर स्वरूप के नहीं है। और जिनमें छात्र
नकल का प्रयास करते हुए पकड़े जाए म.प्र. माध्यमिक शिक्षा अधिनियम
1965 की धारा-8 (क, क) के अंतर्गत छात्रों पर शास्तियां अधिरोपित करने
हेतु मण्डल द्वारा कार्यवाही की जायेगी, ऐसी प्रकरणों को पुलिस को
नहीं सौंपा जावे वरन् छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल, रायपुर को
नियमानुसार, अग्रेषित किया जावे। इन प्रकरणों का म. प्र. माध्यमिक
शिक्षा मण्डल विनिमय 1965 की धारा 125 के अंतर्गत सूक्ष्म परीक्षण
कर मण्डल की परीक्षाफल समिति अपना निर्णय लेगी। जिन प्रकरणों में परीक्षाफल
समिति यह उचित समझे कि प्रकरण पुलिस को सौंपा जाना चाहिये, उन प्रकरणों
को पुलिस को सौंपा जावेगा। अन्यथा विनियम 125 की धारा के अन्तर्गत
यथा स्थित छात्रों पर शास्ती आरोपित की जावेगी, जिसके अन्तर्गत उसकी
परीक्षा निरस्त करना एवं एक अथवा दो अथवा तीन वर्ष के लिए परीक्षा
से वंचित करना शामिल है। |
5. |
अतः संबंधित प्रकरणों में उपर्युक्त प्रकार की कार्यवाही करने का कष्ट
करें। |
सचिव
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल, रायपुर
|